Author Archives: Anonymous from Net

समर शेष है

ढीली करो धनुष की डोरी, तरकस का कस खोलो किसने कहा, युद्ध की बेला गई, शान्ति से बोलो? किसने कहा, और...

किसको नमन करूँ मैं भारत?

तुझको या तेरे नदीश, गिरि, वन को नमन करूँ, मैं ? मेरे प्यारे देश ! देह या मन को नमन करूँ मैं ? किसको नमन...

विजयी के सदृश जियो रे

वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा संभालो चट्टानों की छाती से दूध निकालो है रुकी जहाँ भी धार शिलाएं...

परिचय

सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैं स्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैं बँधा हूँ, स्वपन हूँ, लघु वृत हूँ मैं नहीं...

आग की भीख

धुँधली हुई दिशाएँ, छाने लगा कुहासा कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँसा कोई मुझे बता दे, क्या आज हो...

कलम, आज उनकी जय बोल

जो अगणित लघु दीप हमारे तुफानों में एक किनारे जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन मांगा नहीं स्नेह मुंह खोल कलम,...

रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद

रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद, आदमी भी क्या अनोखा जीव है । उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता, और...

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है । करता नहीं क्यों...

हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती……….

हिम्मत करने वालो की हार नहीं होती लहरों से डर कर नैया पार नहीं होती. नन्ही चींटी जब दाना ले कर...

आर्य – मैथिलि शरण गुप्त

हम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभी आओ विचारें आज मिल कर, यह समस्याएं सभी भू लोक का गौरव,...