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Children Enjoy Diwali With Fire Crackers
Children Enjoy Diwali With Fire Crackers
GO AHEAD, CHILDREN!
ENJOY YOUR DIWALI.
(It must be said again and again) by Shubhranshu
It is Diwali again and your teachers and many-many NGOs visiting...
करवा चौथ : गर्व से कहो मैं विशुद्ध पारंपरिक भारतीय गृहणी हूँ – राजीव उपाध्याय
करवा चौथ : गर्व से कहो मैं विशुद्ध पारंपरिक भारतीय गृहणी हूँ – राजीव उपाध्याय
Written by Anonymous from Net | September...
करवा चौथ : गर्व से कहो मैं विशुद्ध पारंपरिक भारतीय गृहणी हूँ – राजीव उपाध्याय
करवा चौथ : गर्व से कहो मैं विशुद्ध पारंपरिक भारतीय गृहणी हूँ
राजीव उपाध्याय
मैं भारतीय नारी...
जिहाद : मुंशी प्रेम चाँद की मार्मिक और हिन्दुओं के लिए शिक्षाप्रद कहानी
ज़िहाद – मुंशी प्रेमचंद
बहुत पुरानी बात है। हिंदुओं का एक काफ़िला अपने धर्म की रक्षा के लिए...
स्पेशल नवरात्र थाली : पुनः विचारें : उपवास या उपहास
स्पेशल नवरात्र थाली : पुनः विचारें : उपवास या उपहास
राजीव उपाध्याय
पिछले पचास वर्षों नवरात्र...
बंगाल , ज्ञानेश कुमार और दुर्योधन वध : Extra Ordinary Solutions To Extra Ordinary Problems
बंगाल , ज्ञानेश कुमार और दुर्योधन वध : Extra Ordinary Solutions To Extra Ordinary Problems
Rajiv Upadhyay
Any doctor will tell you that however distasteful it may look but amputation...
छोड़ दो आँचल … परिधान की शालीनता
छोड़ दो आँचल … परिधान की शालीनता
हेमंत कुमार
छोड़ दो आँचल …
ब्लॉग की इस कड़ी का शीर्षक भी...
The Silent Death of Love And Romance With Saree : Every One Knows Yet Can Not Acknowledge It
The Silent Death Of Love And Romance With Saree : Every One Knows Yet Can Not Acknowledge it.
Rajiv Upadhyay
It is strange to admit that in a land which still celebrates love of Radha and Krishna after say 5000 years , the love and romance died...
मैं तुलसी तेरे आँगन की… तुलसी महात्म्य
मैं तुलसी तेरे आँगन की… तुलसी महात्म्य
हेमंत
ब्लॉग की इस कड़ी का शीर्षक 1978 में निर्मित एक प्रसिद्ध हिंदी फ़िल्म से लिया है, लेकिन चिंता न करें, मैं उस फ़िल्म के बारे में बात नहीं करूँगा। आज का विषय है पवित्र तुलसी।
बचपन से ही तुलसी के बारे में सुनते और देखते आए हैं। जब ददिहाल, मिर्ज़ापुर, जाते थे तो आँगन में तुलसी का एक पौधा देखते थे जिस पर दादी नित्य-प्रति जल चढ़ाती थीं। दिया भी जलाती थीं। हमारे अपने घर में तो कोई तुलसी का पौधा था नहीं – कम से कम जिस भांति ददिहाल में था वैसा तो बिलकुल नहीं। नौकरी करने और फ्लैटों में जाने के बाद तो आँगन भी नहीं रहा। सरकारी सेवा-काल में तो कई जगहें बदलीं, घर बदले, और कहीं कहीं तुलसी के पौधे भी लगे मिले लेकिन जिस परंपरा का निर्वाह दादी करती थीं, वैसा मैंने अपने आस-पास नहीं देखा। मैंने यह सुना था कि तुलसी को माँ का स्थान दिया गया है।
तुलसी क्या है
तुलसी का वैज्ञानिक नाम है ओसिमम टेनुइफ़्लोरम है और अंगरेज़ी में इसे होली बेसील (Holy...

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