स्पेशल नवरात्र थाली : पुनः विचारें : उपवास या उपहास

स्पेशल नवरात्र थाली : पुनः विचारें : उपवास या उपहास

राजीव उपाध्याय

पिछले पचास वर्षों नवरात्र के व्रत रखने मैं कुछ अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं .

पारम्परिक शारदे नवरात्र का उद्गम भगवान् राम के युद्ध से पूर्व माँ दुर्गा के विजय के वरदान के लिए नौ दिन का निर्जल उपवास से हुआ था . नौ दिवस की कठिन अराधना से प्रसन्न हो माँ दुर्गा स्वयं प्रगट हुईं  और उन्होंने भगवान् राम को रावण  पर विजय का आशीर्वाद दिया . तभी से नौ दिन की दुर्गा पूजा की प्रथा और नवरात्र व्रत का प्रारम्भ हुआ . चैत्र नवरात्र की नौ दिन के युद्ध के बाद महिषासुर मर्दन की अलग कहानी है .

उपवास की प्रथा हिन्दुओं मैं आत्म्शुद्धी की पुरानी परम्परा है  और ऋग वेद मैं भी यज्ञ से पहले इसका शुद्धि के रूप मैं वर्णन है . छान्दोग्य उपनिषद मैं लिखा है की उपवास से मन शुद्ध हो जाता है और अंतरात्मा की आवाज़ साफ़ सुनी देती है . नवरात्र से भी पहले एकादशी व्रत , निर्जला एकादशी व्रत इत्यादि अनेक  व्रत भारतीय महिलाएं रखती थीं . आधुनिक विज्ञान ने  भी Intermittent fasting  के लाभ को स्वीकारा है क्योंकि इससे पाचन तंत्र को आराम मिलता है . इसलिए कभी सिर्फ पुरानी धार्मिक परम्परा के लाभकारी होने का आधुनिक विज्ञान ने भी सत्यापन कर दिया है .

जो लोग पूरे दिन का व्रत नहीं रख सकते उनके लिए एक समय खाना , केवल रात्रि का खाना खाना या फलाहार का भी प्रावधान है . परन्तु किसी भी तरह के भोजन का कम करना मानसिक एवं शारीरिक लाभ के लिए आवश्यक है .

फलाहार मुख्यतः फलों का सेवन होता है . कुछ अन्न जैसे सिंघाड़े या कुटू का आटा भी फलों से बनते हैं इसलिए उनका भी सीमित सेवन फलाहार मैं शामिल है .

पिछले कुछ वर्षों मैं पैसे ज्यादा आने के साथ बिना तप या त्याग के पुण्य कमाने की होड़ फैल गयी है . इसमें पहले दिल्ली के कुछ रेस्टोरेंट नवरात्र मैं मांसाहारी खाना नहीं बनाते थे . फिर व्रत के सामान को ढूँढने और बनाने के झन्झट से बचाने के लिए एक फलाहारी थाली परोसी जाने लगी . कालांतर मैं उसमें अनेको पकवान जुड़ने लगे . अब तो नवरात्र की स्पेशल थाली दिवाली के खाने से भी भारी होने लगी .        

जो उपवास एक  शुद्धि का साधन था स्पेशल नवरात्र थाली उसका एक विकृत रूप बन गयी है जिससे कोई भी लाभ नहीं मिल सकता . भगवन राम के नौ दिन के निर्जल उपवास को याद कर इस व्रत को पारंपरिक ही रहने दें .

यह एक पुनः विचार की प्रस्तुति है न किसी को छोटा या बड़ा दिखने की दौड़ है .

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