Recalibration Not Rupture: बेख़ौफ़ और पूर्णतः सुचारू युनुस का प्रचंड भारत विरोधी बांग्लादेश भारतीय सुरक्षा के लिए और विकराल खतरा हो जाएगा
बांग्लादेश भारत के लिए एक और चीन बन गया है . भारतीय सुरक्षा के लिए बड़ा ख़तरा बनता जा रहा है परन्तु व्यापार पर बहुत प्रभाव नहीं पडा है .

२०२४ और २०२५ मैं व्यापर लगभग बराबर ही रहा यद्यपि रिश्ते टूटने की कगार पर आ पहुंचे हें . साल के आखिरी छः महीने मैं भारत का निर्यात दस प्रतिशत और आयात छः प्रतिशत घटा है पर वह भी कोई बड़ी बात नहीं है. व्यापार दोनों के हित मैं है इसलिए चल रहा है.
परन्तु निरंतर व्यापार बंगलादेश की चालाकी भी हो सकती है . वह पाकिस्तान , चीन , तुर्की और अमरीका के साथ मिल कर भारत का मानसिक रूप से पूर्ण शत्रु बन गया है पर अभी वह समय का इंतज़ार कर रहा है . धीरे धीरे वह इतने हथियार खरीद लेगा कि भारत उस पर हमला न कर सके उसके बाद उसका असली रूप सामने आयेगा.
पाकिस्तान से जे ऍफ़ – १७ जहाज़ की खरीद मात्र शुरुआत है . अगले पांच वर्षों मैं तुर्की और चीन उसे पांचवी पीढी के हवाई जहाज , एच क्यु – ९ मिसाइल रक्षा प्रणाली , ड्रोन और पनडुब्बी दे देंगे . अगर उसने चीन को तीस्ता नदी पर बाँध का ठेका तो दे ही दिया है अगर उसने सीमा से सटा लाल मोनिर्हात हवाई अड्डा दे दिया तो हमारा पूरा बंगाल ओड़िसा और पूर्वोत्तर खतरे मैं आ जायेगा . वहां सरकार कोई भी हो अंततः शनैः शनैः मिलिट्री को मजबूत करेगी और चीन , पाकिस्तान व तुर्की के साथ गठबंधन करेगी . भारत को व्यापार का झुनझुना खेलने के लिए देती रहेगी .चीन उठते हुए भारत को दबाने के लिए पाकिस्तान की तरह उसको किसी दिन परमाणु हथियार भी दे देगा और अमरीका भी चुप रहेगा . अंततः भारत के टुकड़े करना चीन , अमरीका और इस्लामिक देशों को बहुत भायेगा .

भारत ने शांति पूर्ण हथियार जैसे कपास , चावल , प्याज न देकर , जमीन का रास्ता व हवाई अड्डे रोक कर सोचा था कि युनुस सुधर जाएगा पर हुआ इसके विपरीत . अगर जिया उर रहमान के बेटे भी प्रधान मंत्री बनेगें तो भी बांग्लादेश इसी रास्ते पर चलेगा क्योंकि वहां की जनता १९४७ से पहले से पाकिस्तान से भी ज्यादा घोर हिन्दू विरोधी रही है और आज भी है . इसलिए तारिक रहमान भारत को नाराज़ तो नहीं करेंगे पर चीन तुर्की और पाकिस्तान से अच्छे सम्बन्ध बना कर रहेंगे. अगले चुनाव से पहले श्रीलंका और नेपाल की तरह चीन उनको भी फालतू का विकास का क़र्ज़ और नेताओं को रिश्वत दे कर कब्ज़े मैं ले लेगा .
शेख हसीना कि आवामी लीग अभी बहुत कमज़ोर है और अगले चुनाव मैं भी उसको शायद भाग नहीं लेने दिया जाएगा जिसका चीन व अमरीका समर्थन करेंगे . शायद शेख हसीना तब तक न रहें . इसलिए वहां भारत का खैर ख्वाह कोई नहीं होगा .
इस परिस्थिति से बचना भारत की विदेश निति का सबसे बड़ा इम्तिहान होगा .
परन्तु भारत को भी श्रीमती इन्दिरा गाँधी की तरह साहस कर यदि ज़रा भी अंदेशा हो हो रंगपुर और चिटगांव पर अभी या जल्दी से जल्दी कब्ज़ा कर लेना चाहिए . अपने चिकेन नैक को कम से कम अस्सी किलोमीटर का कर दें .बाद मैं त्रिपुरा या मिजोरम से एक रास्ता लेकर बेशक चितगाँव वापिस कर दें . म्यन्मार का सितवे पोर्ट अभी भी फंसा हुआ है और चीन उसे सफल नहीं होने देगा. इसलिए चिटगांव का तीस किलोमीटर का कोरिडोर आवश्यक है . इजराइल के पाकिस्तानी नुक्लेयर ठिकानों पर हमला न करने देने की आज भारत को बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है . सदा से उहा पोह मैं फंसा भारत अगर यह नहीं कर पायेगा तो हम अमरीका व चीन को भारत तोड़ने से रोक नहीं पाएंगे . हर वर्ष नए हथियारों से इस हमले की कीमत बढ़ती जायेगी और हम कुछ ही वर्षों मैं कलकत्ता कि सुरक्षा के लिए चिंतित रहने लगेंगे .
बंगला देश की अर्थ व्यवस्था के बच जाने का कारण उसका टेक्सटाइल उद्योग है . सब परेशानियों के बावजूद उसका निर्यात ८ प्रतिशत बढ़ गया ( ४८ बिलियन डॉलर ) और आयात घट गया . विदेशी मुद्रा का भण्डार जरूर कम हुआ था पर अब ठीक होने लगा है.महंगाई दस प्रतिशत है पर कम हो जायेगी. भारत वहां की अनिश्चतता का फायदा नहीं उठा पाया क्योंकि हमारी लेबर कीमत १८० डॉलर है जब की बांग्लादेश की मात्र ११० डॉलर प्रति माह है . उसने कपास यार्न इत्यादि चीन से खरीद लिए. फिर अमरीका ने उसे आई एम् ऍफ़ से कर्जा व सहायता दिलवा दी . उसके प्रवासी नागरिकों की रेमिटेंस ने भी बहुत मदद कर दी . अब वह भारत के किसी वश मैं नहीं है.
रामायण की चौपाई है
‘ भय बिन प्रीत न होत गोसाईं ‘
जब तक भारत का ऐसा भय नहीं होगा जिसका काट चीन व अमरीका न कर सकें तब तक बांग्लादेश से मित्रता संभव नहीं है .भारत को नए प्रधान मंत्री से एक मुश्त सब समस्यायों की बात करनी होगी. अकेले गंगा या तीस्ता के पानी कि बात और कुछ बढे निर्यात का झुनझुना ठुकराना होगा .
तालिबान कि तरह बांग्लादेश यदि पाकिस्तानी वैर को आज अधिक महत्त्व दे भी दे पर दस साल मैं वह खुद ही बड़ा ख़तरा बन ही जाएगा !
हम सिर्फ इश्वर की प्रार्थना मात्र से ही यदि संतुष्ट हो गए तो यह आत्म ह्त्या होगी !

