Ten Years Of Jobless Growth For The Educated Youth And Vacant B.Tech Seats In IITs : नीट के लीक हुए प्रश्न पत्र से बड़ी समस्या है !
इस वर्ष संभवतः पहली बार जे ई ई की सप्लीमेंट्री परीक्षा हो रही है क्योंकि आइआइ टी जैसे प्रतिष्ठित संस्थाओं मै भी बी टेक की सीटें नहीं भरी गयी . सिविल इंजीनियरिंग ही नहीं बल्कि कंप्यूटर साइंस जैसी शाखाओं मैं छात्रों ने ज्वाइन नहीं किया . पहली बार ही आई आई टी मुम्बई के छात्रों को भी नौकरी नहीं मिली. अब प्रतिभावान बच्चे मंहगी बी टेक की पढाई नहीं करना चाहते क्योंकि उसके बाद नौकरी से लोन भी नहीं चुकाया जा सकता है .
कम पढ़े बच्चे डिलीवरी बॉय की नौकरी से बेरोज़गारी के अपमान से बच रहे हैं परन्तु नौ हज़ार रूपये से घर तो नहीं चलता . सरकार ने पकोड़े बेचने की सलाह देकर पल्ला झाड लिया . बाकि आंकड़ों की हेरा फेरी से जनता को भ्रमित कर देंगे . पर आई आई टी की खाली सीटें सच को सामने ले ही आयेंगी. देश की विभिन्न आयु की औसत आय देखिये और खुद फैसला कीजिये .
1, 15-19 yrs 8838/pm (HT )
2.19-24 yrs 14435/pm
3. 24-29 yrs 20860/pm
4.30-40 yrs 23624/pm
5. 40 and above 23995/pm
यह देश के पतन का नया मापदंड है .
एक दो चमकीले स्टार्ट अप या दस बीस गूगल की लाखों वाली नौकरियों का मीडिया मैं प्रदर्शन कर सत्य को झुटलाया नहीं जा सकता की देश मैं शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी बहुत बढी है . कुछ एम् बी ए अगर चाय की दुकान खोल कर कमा भी लें तो यह आदर्श नहीं है शर्मनाक है . क्योंकि उनकी सारी पढाई बड़ी कंपनियों के लिए उपयुक्त थी.
उदाहरण के लिए कंप्यूटर कंपनियों की वार्षिक युवा भर्ती २०१० से लगभग दो लाख सालाना हो रही है . इसमें कोई ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है . यही नौकरियां ही देश की युवा पीढी की आशा हैं . पर यहाँ भी लगभग दस साल तक प्रारंभिक वेतन ४-५ लाख रूपये सालाना था जबकी इस दौरान फीस और मंहगाई बहुत बढ़ गयी है. इस लिए अब बैंक से कर्जा लेकर पढने वाले गरीब प्रतिभावान बच्चे अब नहीं पढ़ रहे . अमीर माँ बाप की औलादों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता .
इन वर्षों मैं इंजीनियरिंग की सीट लगभग दुगनी हो गयी हैं . छोटे कस्बों मैं भी बच्चे कोचिंग ले रहे हैं . इस लिए बहुत बच्चे इम्तिहान मैं बैठने लगे . इस लिए दो लाख नौकरी २०१० मैं बहुत अच्छी लगती थीं अब बहुत कम लगती हैं .
इसके अलावा रिसर्च और बैंकिंग , वित्त सम्बन्धी नौकरियां भी थोड़ी बढी हैं . पर सब मिला कर स्थिति भयंकर ही है . विदेशी पढाई भी अब खतरे मैं है क्योंकि वहां भी अब नौकरियां कम हो रही हैं .
सरकार के विकास के दावे जैसे आई पी एल की मार्किट कैपिटल के 20 बिलियन डॉलर तक बढना या स्टेट बैंक के शेयर का दस गुना बढ़ने से युवा को क्या मतलब . यह सट्टे बाजी से पैदा हुई ग्रोथ धोखा और झुठावा है और देश को भ्रमित करती है . अब तो आई टी कम्पनी भी शेयर के दाम बढाने के लिए युवाओं को नौकरी से निकाल रही हैं बैलेंस शीट को अच्छा दिखाने के लिए.
सरकार को अम्बानी अदानी के मोह जाल से निकलना होगा . बीस बड़े उद्योगपति भारत की औद्योगिक प्रगति तो सुनिश्चित कर सकते है परन्तु यह जॉब लेस ग्रोथ देश के युवाओं के लिए बड़ी भयावह स्थिति बना रही है . सरकार यदि इसका समाधान तुरंत नहीं ढूंढती तो कोई विदेशी ताकत इसका दुरूपयोग कर बड़ा आन्दोलन शुरू कर देगी जो निराश युवा वर्ग को अपनी और खींच लेगा .
सरकार को शिक्षित बेरोजगारी के लिए तुरंत राहत की स्कीम लानी चाहिए .

