Proposed Research Promotion Budget Of 1 lakh Crore : निम्न स्तर , फालतू के सामाजिक विषय , बाबुओं और भ्रष्टाचार से बचाना आवश्यक है , पहले सिर्फ औद्योगिक रिसर्च , दवाओं , AI और रक्षा पर ध्यान दें .
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Kautilaya Economic Conclave 2026 मैं अपने अभिभाषण मैं भारत मैं रिसर्च को प्रोत्साहन देने के लिए एक लाख करोड़ रूपये के फण्ड की आवश्यकता का जिक्र किया . जाहिर है की सरकार ही इतने पैसे खर्च कर सकती है .
देश मैं मोबाइल से कारों तक सारा उत्पादन विदेशी कंपनियों के सामान को लाइसेंस ले कर बनाया जाता है . अपने डिजाईन और उत्पादन सिर्फ DRDO /ISRO BARC इत्यादि ही करसकते हैं . हमारे उद्योगपति खतरा नहीं उठाना चाहते इसलिए सिर्फ बहुत सफल वस्तुओं की फक्ट्रियाँ लगाते हैं . ज्यादा से ज्यादा विदेशी माल को भारत के अनुरूप करते हैं . कम से कम दस से बारह प्रतिशत शुद्ध मुनाफे की खोज मैं रहते हैं . हमारे यूनिवर्सिटीज की रिसर्च भी निम्न स्तर की ही होती है . वह किसी विदेशी रिसर्च के बड़े प्रोजेक्ट मैं छोटा सा योगदान दे सकती हैं . बाक़ी तो फालतू के साहित्य भाषा समाज शास्त्र इत्यादि मैं अपना और छात्रों का समय व्यर्थ कर डिग्रियां देती हैं . इसमें हमारे शीर्ष संस्थान IIT/IISc/TIFR हैं .
सरकार ने एक PM Skill Development योजना चलायी थी . इस पर लगभग पिछले दस वर्षों से अधिक समय मैं १२००० करोड़ रूपये खर्च हो गए . पर परिणाम खर्चे के मुकाबले बहुत कम निकला .
यदि निर्मला जी ने रिसर्च के एक लाख करोड़ रूपये बाबुओं के भरोसे छोड़ दिए तो पूरा पैसा स्किल डेवलपमेंट की तरह बर्बाद हो जाएगा . आखिर मैं आपस मैं रेवड़ियाँ बांटी जायेंगी और महमूद बघर्रा के नाश्ते और तलवारों पर रिसर्च होने लगेगी.
देश की रेर्संच संस्कृति धीरे धीरे ही बदलेगी . शुरू के दस साल सिर्फ Project based Applied Engineering / Science / Medical / Defence / Space / Atomic Energy and AI पर ही आंशिक मदद दें . एक तिहाई खर्चा औद्योगिक घराने दे . अमरीका की तरह अभी पहले हमारे विश्व विद्यालय भी औद्योगिक प्रोजेक्ट से आधा पैसा लें और उनको संतोष जनक लाभ दें . इससे धीरे धीरे हमारी रिसर्च की दिशा बदलेगी .
एक बार स्वर्गीय राजीव गाँधी ने कहा था की सरकार के एक रूपये मैं सिर्फ पंद्रह पैसे ही गरीब को मिलते हैं . अगर बाबुओं के हाथ यह प्रोजेक्ट दे दिया तो इसकी भी वेदी ही मिट्टी पालित होगी .
वित्त मंत्री को उद्योगों / रक्षा / परमाणु / AI के संस्थानों के साथ मिल कर किसी स्वर्गीय राष्ट्रपति अब्दुल कलम या नंदन नीलकेनी जैसे व्यक्ति को इस प्रोजेक्ट का पूरा अधिकार देकर शुरू करना चाहिए जैसे श्रीमती गाँधी ने मिसाईल के साथ किया था . अच्छे स्थाई परिणाम बीस साल के कठिन परिश्रम से आयेंगे .किसी बाबु या नेता को को प्रत्यक्ष या परोश रूप से दखलंदाजी न करने दी जाय.


