1763 मैं मीर जाफर के जगत सेठ महताब चंद की व परिवार की हत्या व् उनके आर्थिक साम्राज्य के दुखद अंत ; क्या भारतीय धन्ना सेठों को विदेशियों के चुंगुल मैं फंसने की दुर्दांत कथाओं से शिक्षा लेनी चाहिए ?
१७५६ मैं प्लासी की लड़ाई मैं उनके सेनापति मीर जाफ़र ने युद्ध के बीचों बीच पाला बदल लिया और इससे रोबर्ट क्लाईव की जीत की कहानी तो सब जानते हैं . परन्तु इसमें बंगाल के सेठों के षड़यंत्र और उनकी अंततः ह्त्या व् दुर्दशा की कहानी आज के भारतीय सेठों को जानना जरूरी है.
1763 मैं मीर जाफर के जगत सेठ महताब चंद की व परिवार की हत्या व् उनके आर्थिक साम्राज्य के दुखद अंत ; क्या भारतीय धन्ना सेठों को विदेशियों के चुंगुल मैं फंसने की दुर्दांत कथाओं से शिक्षा लेनी चाहिए ?
अमरीकी विदेश मंत्री का सीधे मुंबई आना व अम्बानी की जामनगर रेफिनारी जाना एक सामान्य घटना नहीं है . कोई इसके पूरे सत्य को उजागर नहीं कर रहा है इसलिए इसका अनुमान लगाना संभव भी नहीं है . अमरीका मैं कहने को डीजल की बहुत कमी हो गयी है और वह रूस से भी डीजल खरीद रहा है . पर अम्बानी की रिफाइनरी तो साल मैं कुल २५ मिलियन टन डीजल बनती है जिसमें से १० मिलियन टन के लगभग निर्यात करती है .भारत की अपनी जरूरत हिन् ९० मिलियन टन है. जम्नागागर की कुल कैपेसिटी १.२ मिलियन बैरल की है . वेनेजुला अभी तो सिर्फ १ milion बैरल तेल का उत्पादन कर रहा है पर १९७० के दशक मैं उसका सर्वोत्तम उत्पादन भी सिर्फ ३ million बैरल ही था . रिलायंस daily लगभग तीन लाख बैरल ही वेंज़ुला का तेल साफ़ कर पायेगी. अमरीका की अपना तेल उत्पादन ४.८ मिलियन बैरल प्रतिदिन का है .
इतनी छोटी डील के लिए अमरीकी विदेश मंत्री का जामनगर आना और अम्बानी अदानी से मिलना प्राकृतिक नहीं लगता .
अब पुनः भारतीय सेठों की कहानी पर आते हैं . जगत सेठ महताब चाँद से नबाब सिराजुद्दौला ने तीस लाख रूपये मांग लिया और मना करने पर दरबार मैं चांटा मार दिया . अपमानित सेठ ने सेनापति मीर जाफ़र से मिल कर षड्यंत्र रचा और नबाब सिराजुद्दौला की पराजय व् ह्त्या हो गयी. पर मीर जफ़र क्लाईव का हुकुम नहीं माना तो मीर कासिम को नबाब बना दिया . मीर कासिम ने सिर्फ छः साल बाद १७६३ मैं जगत सेठ महताब चाँद और उनके भाई को मुंगेर के किले से बोरे मैं बांध कर नदी मैं फ़ेंक दिया और इस तरह उनकी दुर्दांत मौत हुई. कुछ दिनों मैं उनकी टकसाल को अंग्रेजों ने ले लिया . अंततः जगत सेठ के परिवार वाले अंग्रेजों की पेंशन से जीवित रहने पर मजबूर हो गए .
इसलिए इस कहानी से भारतीय धन्ना सेठों को शिक्षा लेनी चाहिए और विदेशियों के बड़े से बड़े प्रलोभन या ब्लैकमेल से बचना चाहिए . उनकी रक्षा सरकार और देश का कर्तव्य है . पर देश द्रोह या भारतीय राजनीती मैं दखल उनका जगत सेठ वाला हाल ही कर देगा .
सभी भारतीय उद्योगपतियों और व्यापारियों को जगत सेठ की कहानी से शिक्षा लेनी चाहिए.


