Artemis After Apollo ; The New American Lunar Mission : क्या चाँद पर भी अमरीकी बादशाहत होगी : भारत कहाँ है ?

Artemis After Apollo; The New American Lunar Mission : क्या चाँद पर भी अमरीकी बादशाहत होगी : भारत कहाँ है ?

राजीव उपाध्याय

10 अप्रेल की  रात को अमरीकी आर्टेमिस – २ अन्तरिक्ष विमान चाँद का चक्कर लगा कर प्रशांत महासागर मैं गिर गया और उसके चारों यात्री सुरक्षित निकल लिए गए . प्रश्न यह है कि अमरीका का नासा तो अपोलो  के तहत सन 1969  मैं ही चाँद पर मानव भेज  चुका था   और उसके बाद उसने 5 और  मिशन मैं १२ यात्री चाँद पर  पर  उतारे थे और वहां की चट्टान भी पृथ्वी पर ले आया था . तब १९७२ मैं खर्चीला होने के कारण उसे बंद कर दिया गया था .

तो अब जब अमरीका की आर्थिक स्थिति और ख़राब है तो वह क्यों आरटेमिस मिशन को पुनः जीवित कर दिया है और इसमें क्या नया है ?

आर्टेमिस – १   २०२२ मैं गया था और चाँद का चक्कर लगा कर आ गया . अब आर्टेमिस -२ मैं मानव अतरिक्ष यात्री चाँद का चक्कर लगा कर बिना उतरे वापिस आ गए .अरतिमिस – ३ पृथ्वी की Low orbit मैं एलोन मस्क की कंपनी के स्पेस स्टेशन मैं लोग भेजेगा . अरतिमिस – ४ २०२८ मैं चाँद पर पुनः मानव यात्री उतारेगा .

२०३३ मैं पूरी अन्तरिक्ष कालोनी बना ली जाएगी . अमरीका के अलावा , यूरोप , कनाडा , ऑस्ट्रेलिया , जापान , इटली भी इसमें जुड़ेंगे .

अमरीका अब चाँद पर अपनी कालोनी बनाना चाहता है जहाँ लगातार अमरीकी लोग रहेंगे और वैज्ञानिक परिक्षण करेंगे . इसके लिए वह एक नए बड़े और अत्यधिक शक्तिशाली राकेट  को बना रहा है .चाँद पर जाने के लिए एलोन मस्क और अमेज़न की कंपनियां राकेट बनाएंगी . वहाँ  पर ड्रोन उडाये जायेंगे . बिजली के लिए एक परमाणु बिजली घर बनाया जाएगा .चाँद की रात बहुत ठंडी होती है . उसका सामना करने की तकनीक विकसित की जायेगी . अंत मैं चाँद पर रह कर मंगल गृह पर जाने कि तकनीक भी विकसित की जायेगी. वहां के खनिज पदार्थों का अध्ययन किया जाएगा .

इस तरह चाँद पर भी पश्चिमी देशों का बोलबाला होगा .

चीन भी २०३० तक अपना पहला  मानव यात्री वाला अन्तरिक्ष यां चाँद पर उतारेगा

भारत अपने गगन यान  व चंद्रयान – ४ को आगे बढ़ा रहा है और 2027 मैं पहला मानव अन्तरिक्ष यात्री भेजेगा . २०४० तक अपना पहला अन्तरिक्ष  यात्री चाँद पर भेजने की तैयारी कर रहा है.

अपने सीमित संसाधनों मैं भारत की पहल सराहनीय है . हम भी चीन की तरह अपनी वैज्ञानिक क्षमता को उपयोग मैं ला कर एक स्वाबलंबी अन्तरिक्ष कार्यक्रम चला रहे हें . अगर जापान या रूस इसमें हमारे लम्बे साथी बन जायेंगे तो शायद यह जल्दी भी हो जाये .

परन्तु राष्ट्रपति ट्रम्प का मुख्य उद्देश्य अन्तरिक्ष मैं अमरीका को सिरमौर बनाए रखने का  है और अब नासा के अलावा स्पेस – एक्स और अमेज़न की ब्लू मून कम्पनी भी आगे आयेंगी. अमरीका अब अपनी नयी पीढी को वैज्ञानिक रिसर्च के लिए तैयार कर रहा है.

भारत समेत बाकी विश्व भी इसमें आगे तो बढेगा पर अमरीकी शहंशाहत  को कोई चुनौती नहीं दे सकेगा .

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