India’s Jain Diaries and America’s Epstein Files :Why Epstein File Disclosures Must Be Publicly Ignored In India : न तो ट्रंप न ही अमरीकी जनता को इसकी परवाह है तो हम क्यों दुबले हों ?
In 1991, an arrest linked to militants in Kashmir led to a raid on hawala brokers, revealing evidence of large-scale payments to national politicians.[2] On 25 March 1991, as per the court proceedings published by the Supreme court of India, Ashfak Hussain Lone, a person alleged to be an official of the terrorist organisation Hizbul Mujahideen, was arrested in Delhi. During his interrogation, the police learnt that his organisation was funded through hawala, using Surendra Kumar Jain and his family as a conduit.( Wiki )
पर अंत मैं उच्चतम न्यायलय ने सही निर्णय दिया कि किसी डायरी मैं कोई नाम हो तो वह बिं अन्य सबूतों के अपने आप मैं कोई गवाही नहीं मानी जा सकती .
आज इसी तरह अमरीकी एप्स्टीन फाइल का नाम बहुत उछल रहा है. किसी की डायरी मैं कोई नाम लिखा होना कोई सबूत नहीं माना जा सकता . इस तरह से तो किसी को भी ब्लैक मेल किया जा सकता है . हां इस आधार पर जांच शुरू की जा सकती है .
जानकार लोग अच्छी तरह समझते हें की एप्स्टीन एक बड़ी जासूसी संस्था का मात्र छोटा सा एजेंट था . जिस देश को इससे फायदा हो रहा हो वह वहीँ जासूसी संस्था का एजेंट था .हमें इसको बिलकुल नहीं सुनना चाहिए जिससे हमारे नेता ब्लैकमेल न हों . एप्स्तीन ने अमरीकी जेल मैं तथा कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी.
जिस समाज मैं खुली वैश्यावृति को आज़ादी है ( हॉलैंड) , जहाँ एक अकेली पोर्न साईट Mind Geek , $700 million का व्यापार करती हो उस समाज मैं सेक्स स्कैंडल कि अब कोई स्कैंडल ही नहीं है . बिल क्लिंटन मोनिका लेवंस्की इस लिए फंस गए को वह वाइट हाउस की ट्रैनिंग स्टाफ थी . राष्ट्रपति कैनेडी तो मीटिंग से उठ कर मर्लिन मुनरो से सम्बन्ध बना कर वापिस आ कर फिर मीटिंग करने लगे .राष्ट्रपति ट्रम्प ने तो सब कुकृत्य कर लिए और अब भी दन दनाते फिर रहे हें .
Epstein Files has 6 million pages .
क्या कोई सामान्य व्यापारी इतनी विशाल कांटेक्ट लिस्ट बना सकता है जिसमे अमरीकी राष्ट्रपति , इंग्लैंड के प्रधान मंत्री , राज कुमार , अनेक देशों के बड़े नेता , बिल गेट सरीखे उद्योगपति सम्मलित हों . ऐसा कौन सा व्यापारी होगा जिससे इंग्लैंड के राजकुमार की पूर्व पत्नी अपना उधार चुकाने मैं सहयता मांगे या जो बिल गेट कि मिस्ट्रेस को मासिक भत्ता देता रहे ? सीधी बात है कि यह किसी बड़ी जासूसी संस्था कि है चाल है .
इसका एक बहुत छोटा हिस्सा सेक्स कृत्य हें जिनमें से कुछ मैं छोटी लड़कियों के साथ भी कुछ लोगों के नाम हें . यही तो माइकल जैक्सन के साथ भी हुआ था . सेक्स एक प्राकृतिक इच्छा है जिसे समाज शादी को मान्यता देता है पर बाकी पर अलग अलग समाज मैं प्रतिबन्ध अलग अलग है . ऋषि विश्वामित्र तो सिर्फ अप्सराओं के नाच से तपस्या खो बैठे थे . चाणक्य ने विष कन्यायें बना कर रखीं थी . राजा पर्वर्तक की ह्त्या भी एक विष कन्या से करवाई गयी थी . सेक्स को दबाने से इच्छा और प्रबल होती है .
हम यह नहीं कहते कि सदाचार को भूल जाएँ . पर विदेशी जासूसों पर विश्वास कर अपने नेताओं को हटाना मूर्खता होगी . उनके कृत्यों के ऊपर निर्णय लिया जा सकता है . परन्तु यदि किसी के बेडरूम मैं झांकेंगे तो वही सब ही तो दीखेगा जो वहां होता है .
यदि राष्ट्र हित से कोई समझौता किया हो या शक करने के लायक पर्याप्त सबूत हों तब ही कोई कार्यवाही होनी चाहिए .
अन्यथा हम विदेश जासूसी संस्थाओं के जाल मैं फंसते जायेंगे .


