Pakistanification Of Iran : IRGC Fires On Indian Vessels Cleared By Civilian Government Of Iran
सौ अच्छे सेव मिल कर भी एक सड़े सेव को ठीक नहीं कर सकते परन्तु एक सडा सेव सौ अच्छे सेवों को ख़राब कर सकता है .
पाकिस्तान वह सडा सेव है जो अच्छे से अच्छे देशों को बिगाड़ सकता है . उसका सबसे नया शिकार ईरान है .
ईरान के विदेश मंत्री ने ट्वीट कर लिखा कि भारत समेत सात मित्र देशों के जहाज़ों होरमुज़ की खाड़ी से बेरोक टोक निकलने दिया जायेगा .
Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi on Thursday said that they have permitted the passage of vessels for friendly countries, including India, through the Strait of Hormuz. Consulate General of Iran in Mumbai said in a post, “Iran FM Abbas Araghchi: We permitted passage through the Strait of Hormuz for friendly nations including China, Russia, India, Iraq, and Pakistan.”
भारत के लगभग सोलह जहाज़ होरमुज़ मैं फंसे हें . भारतीय विदेश मंत्री ने ईरान के विदेश मंत्री से बात की . प्रधान मंत्री मोदी ने भी ईरान के राष्ट्रपति से दो बार बात कि और इस का अच्छा परिणाम यह हुआ कि वहां के विदेश मंत्री ने ट्वीट कर सात मित्र देशों कि सूची जारी कर दी जिसमें भारत भी शामिल था . ईरान की सरकार की बात पर विश्वास कर जब दो भारतीय जहाज़ होरमुज़ पार कर रहे थे तो इरानी रिवोलुशन गार्ड ने उन पर गोलियां चला दीं . हमारे जहाज़ कहते रह गए कि हम मित्र देश भरके जहाज़ हें पर सैनिकों ने गोलियां बंद नहीं कीं . अंततः भारतीय जहाजों को वापिस लौटना पडा .
भारत सरकार ने इरान के उच्चायुक्त को तलब कर कडा विरोध जताया . पर उसके विदेश मंत्री की बात सैनिक नहीं मान रहे .
अब कहानी मैं ट्विस्ट देखिये . भारत सरकार ईरान की चुनी हुई नागरिक सरकार से बात कर रही है जिसके अध्यक्ष वहां के राष्ट्रपति हें . परन्तु पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ईरान के सेना गार्ड प्रमुख से अमरीकी शर्तों पर बात कर रहे हें . प्रधान मंत्री शरीफ की तो असीम मुनीर के सामने बड़े बाबु की भी औकात नहीं है. यही समस्या सुषमा स्वराज जी ने पाकिस्तान के एक इंटरव्यू मैं कही थी कि ‘ पाकिस्तान मैं हम किससे बात करें ‘.
प्रजा तंत्र के वैश्विक रखवाले अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प भी मुनीर से बात करते हें . जनरल राहिल शरीफ भी १० डाउनिंग मैं रात्रि भोज खाते थे . अब जनरल मुनीर ने यह बीमारी ईरान मैं भी फैला दी .वहां की सेना भी अपने राष्ट्रपति की बात नहीं मान रही है . यह एक तरह कि क्रांति ही है जिसे सार्वजानिक नहीं किया जा रहा है . जब तक ईरानी सेना नहीं मानेगी कोई समझौता नहीं होगा . राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान भी नाम मात्र के राष्ट्रपति हें उनकी चल नहीं रही है . पर पाकिस्तान की तरह ईरान मैं भी भारत चुनी सरकार से बात करता है .
भारत के जहाज़ों पर गोली अवश्य ही मुनीर ने चलवाई होगी . भिश्ती को एक दिन का राजा बना दिया है इसलिए चमड़े का सिक्का चला दिया है . युद्ध को तो कभी ख़तम होना ही है . इसलिए आर्थिक आवश्यकताओं के चलते भारत के पास तो ईरान दुबारा आ जाएगा .
पर तेरा क्या होगा मुनीर कालिया ?


