क्या बाबा रामदेव देश के लिए इतना बड़ा ख़तरा हैं या चुनाव से पहले उन्हें भी आसा राम बापू की तरह जेल मैं बिना जामानत के डालना जरूरी है .
प्रश्न है की कौन बाबा से इतना डर रहा है?
एक समय भोजन करने वाले , गेरुए वस्त्र पह्न्नाने वाले, सदा योग की शिक्षा मैं व्यस्त , निस्संतान बाबा से क्या आर्थिक अपराध हो सकते हैं .
यह जनता अनपढ़ हो सकती है बेवकूफ नहीं .
यदि बात मात्र कानून के पालन की है तो कौन मौलाना बुखारी से इतना डर रहा है की वर्षों से उनके गिरफ्तारी के वारंट पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही . यदि बुखारी से आतंकवादियों के गुस्से का दर है तो क्या शंकराचार्य , रामदेव या आसा राम के भक्तों को सरकार गलत सन्देश नहीं दे रही . कानून का सब के लिए बराबर होने का सिद्धांत कहाँ गया . सरकार शांत हिन्दुओं की भावनाओं का निरंतर अपमान कर रही है . क्या इस से अधिक हिन्दू विरोधी सरकार भारत के इतिहास मैं कभी आयी थी . क्या अंग्रेजों का शासन इससे अच्छा नहीं था.
इन सब का उत्तर व् समाधान संतप्त पाठक स्वयं दें .
बाबा रामदेव के खिलाफ एक ही दिन में 81 मुकदमे
नवभारत टाइम्स
रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्ट में कुछ और गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं, जिस पर हफ्ते भर में ट्रस्ट पर कुछ और मामले भी दायर किए जाएंगे। ट्रस्ट के नाम से जमीनों के कई बेनामी सौदे किए गए हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि बाबा रामदेव उत्तराखंड में पतंजलि के नाम का दुरुपयोग कर रहे थे। डीएम हरिद्वार ने इसकी जांच के बाद मुकदमे दर्ज करने की कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि इन मामलों में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ भी सरकार कार्रवाई करेगी। बहुगुणा ने बताया कि डीएम को पतंजलि योगपीठ की जमीनों की खरीद, इनके इस्तेमाल और कब्जों को लेकर शिकायतें मिली थीं। उन्होंने इस मामले की जांच के बाद पाया कि पतंजलि योगपीठ ने पिछले कुछ वर्षों में खरीदी गई भूमि में भारी घोटाला किया है। जमीनों को सरकार से जिन कारणों को बताते हुए क्रय किया गया मौके पर वहां कुछ और ही कार्य हो रहे थे। यह नियम और शर्तों का साफ उल्लंघन है।
ट्रस्ट पर आरोप है कि पतंजलि यूनिवर्सिटी के लिए औरंगाबाद और तेलीवाला गावों की 387.5 एकड़ जमीन सरकार से ली गई थी, जबकि इसके एक छोटे से भाग में 20 एकड़ में ही विश्वविद्यालय बनाया गया है। अन्य जमीन किसी और मकसद के लिए रखी गई है। आयुर्वेदिक दवाओं के कारखाने के लिए मुस्तफाबाद गांव की 141.17 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की मंजूरी ली गई, जबकि उस जमीन पर वेयर हाउस, आटा और तेल आदि के कारखाने लगाए गए हैं, इस प्रकार ट्रस्ट ने मंजूरी की शर्तों का उलंघन किया है।
ताजा कार्रवाई में पतंजलि योगपीठ समेत बाबा के सभी प्रमुख संस्थानों को जद में लिया गया है। स्टांप ड्यूटी चोरी मामलों को लेकर प्रशासन ने रामदेव के दिव्ययोग मंदिर ट्रस्ट, मै. पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट, पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और पतंजलि विश्वविद्यालय को कार्रवाई की जद में लिया है। बाबा रामदेव का सारा आर्थिक साम्राज्य इन संस्थानों पर ही टिका हुआ है। बाबा की ज्यादातर व्यापारिक गतिविधियों का संचालन मै. पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के जरिए किया जाता है। बताया जाता है कि बाबा इनके जरिये प्रतिवर्ष करीब 700 करोड़ रुपये का व्यापार करते हैं।
