Venezuela , Iran and May Be Cuba Next : यदि लाठी नहीं तो तेरी भैंस भी नहीं के नए संसार मैं भारत को अपना रक्षा उपकरण खरीदने का बजट तिगुना कर देना चाहिए – २०३० तक तेजस , राफेल और सुखोई – ५७, पन्दुब्बियाँ , मिसाइल और ड्रोन लो

Venezuela , Iran and May Be Cuba Next : ‘ यदि लाठी नहीं तो तेरी भैंस भी नहीं ‘ के नए संसार मैं भारत को अपना रक्षा उपकरण खरीदने का बजट तिगुना कर देना चाहिए – २०३० तक तेजस , राफेल और सुखोई – ५७, पन्दुब्बियाँ , मिसाइल और ड्रोन लो

राजीव उपाध्याय

पहले अमरीका ने वेनेज़ुएला के पदस्थ राष्ट्रपति को अपहरण कर वहां के विशाल तेल भंडार को ले लिया .अब ईरान पर हमला कर वहां के सुप्रीम अथॉरिटी खामेनी को मार दिया और उसके तेल भंडार को भी कब्ज़ा लेगा . अगला नंबर शायद क्यूबा का हो . कनाडा कि अर्तव्यवस्था को चौपट करने कि तैयारी है. ग्रीन लैंड को हथियाना चाहता है . चीन , यूरोप और तुर्की ज्यादा रूसी तेल खरीदते हें पर सिर्फ भारत को दंड !

तो अचानक यह संसार ‘ जिसकी लाठी उसकी भैंस ‘ से भी आगे निकल कर        ‘ यदि लाठी नहीं तो भैंस भी तुम्हारी नहीं ‘  के युग मैं आ गया है . भारत ने पिछले पंद्रह वर्षों मैं रक्षा पर बहुत कम खर्च किया है . कहने को रक्षा बजट हर साल सात या आठ प्रतिशत बढ़ जता है पर उसका अधिकांश हिस्सा सेना के वेतन और पेंशन मैं खर्च हो जाता है . सेना हम किसी हालत मैं कम नहीं कर सकते क्योंकि युनुस के बाद अब तो चीटिंयों के भी पर निकल आये है . अफ़ग़ानिस्तान के पाकिस्तान पर ड्रोन  हमले के बाद तो स्थिति और विकराल हो गयी है .

इसलिए भारत को अब स्थिति कि गंभीरता को समझना जरूरी है . पिछले वर्षों के पापों का प्रायश्चित भी अब जरूरी है . हमें अ पने ४२ स्क्वाड्रन लड़ाकू जहाज , ड्रोन , मिसाइल और पनडुब्बियों की कमी को २०३० तक पूरा कर लेना अब बहुत जरूरी हो गया है . पहले  की तरह रक्षा सौदों को दशकों मैं पूरा करने के बजाय सर्व श्रेष्ठ टेक्नोलोजी  को तुरंत खरीद लेना चाहिए . इसके बाद भी नयी नयी चुनौतियाँ अन्तरिक्ष , साईबर , कम्युनिकेशन के क्षेत्रों मैं उभर आयी हें .भविष्य मैं टेक्नोलॉजी नयी समस्याएं खडी  करेगी. उसके लिए तैयार होना पड़ेगा .

इसके अलावा हम चीन पर बहुत आश्रित हो गए हें . कम से कम दवाओं , fertiliser और रक्षा सामग्री मैं स्वाबलंबी होना रक्षा के बराबर ही है . तेल व आयातित वस्तुओं का  भण्डार  भी छः महीने का करना आवश्यक है .

इसलिए अब सुरक्षा मात्र प्रार्थनाओं , भक्ति या आशाओं पर आश्रित नहीं हो सकती उसके लिए युद्ध जीतने की तैयारी आवश्यक है .

सोमनाथ को भूलने की गलती दुबारा नहीं होनी चाहिए !

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